Wednesday, October 28, 2009

कृष्णा पूनिया


राजस्थान के चूरू जिले की राजगढ तहसील के छोटे से गांव गागड़वास की बहू और हरियाणा की बेटी श्रीमती कृष्णा पूनिया ने दुनिया की महान एथलीटों में बाइसवां स्थान प्राप्त कर अपना, अपने परिवार, जिले, राज्य और देश का नाम रोशन किया है। विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में जीते हुए उनके दर्जनों पदक, ट्राफी, कप, प्रमाण पत्रा एवं पुरस्कार भी उनका काबिलियत को साबित करते नजर आते हैं। कृष्णा पूनिया अब भी भरे-पूरे परिवार में बाल-बच्चों और पति के साथ गृहस्थी संभालते हुए खेल के लिए समर्पित होकर खून-पसीना एक कर रही है। यह ईश्वर की मेहरबानी है कि पति और देवर नाम खिलाड़ी और अनुभवी प्रशिक्षक हैंं। पति वीरेंद्र पूनिया एवं कृष्णा महाराणा प्रताप खेल पुरस्कार विजेता हैं।
राज्य से सटे हरियाणा के एक गांव के खाते-पीते परिवार से ५ मई १९८२ को जन्मी कृष्णा को कुदरती छह फुटा कद मिला तो हर शुभचिंतक ने उन्हें खेल मैदान पर हुनर एवं करतब दिखाने की सलाह दी। तब अपनी कद काठी के अनुसार कृष्णा ने एथलेटिक्स की डिस्क थ्रो में भाग लेना शुरू कर दिया और सन २००० में ही अखिल भारतीय अंतरविश्वविद्यालय प्रतियोगिता अमृतसर में पहला स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। इसी साल गुलाबी नगर में संपन्न राष्ट्रीय महिला खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता के डिस्क थ्रो मुकाबलों में वे अववल नंबर पर रहीं। तब वे पचास मीटर से कम डिस्क फेंक पाती थीं पर पिछले सात सालों में उन्होंने अपने प्रदर्शन में अभूतपूर्व सुधार कर डिस्क थ्रो प्रतियोगिता में साठ मीटर से ज्यादा दूर डिस्क थ्रो की क्षमता दर्शाई है।
एम.ए. तक की अच्छी शिक्षा प्राप्त एवं रेलवे में कार्यरत कृष्णा पूनिया देश की ऐसी महिला एथलीट हैं जिन्होंने जिला, राज्य, अंतरराज्य, क्षेत्राीय, विभागीय और ओपन स्पर्धाओं में पदकों का शतक बनाया है।
अपने खेल जीवन की शुरूआत में २००३ में उन्होंने बैंगलोर में आयोजित राष्ट्रीय ओपन टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीता और अगले साल २००४ में चेन्नई की राष्ट्रीय अंतरराज्य स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। इसी साल दिल्ली में हुए राष्ट्रीय फैडरेशन कप मुकाबलों में कांस्य पदक पाया। वर्ष २००५ में डिस्क थ्रोअर कृष्णा पूनिया ने पटियाला की राष्ट्रीय सर्किट मीट में स्वर्ण, दिल्ली फैडरेशन कप में कांस्य, हैदराबाद राष्ट्रीय ओपन में रजत, राष्ट्रीय थ्रो मीट दिल्ली में कांस्य और बैंगलोर राष्ट्रीय अंतरराज्य स्पर्धा में भी दूसरा स्थान प्राप्त कर रजत पदक जीता। वर्ष २००६ में उन्होंने राष्ट्रीय सर्किट मीट लुधियाना में स्वर्ण और इसी प्रतियोगिता में दिल्ली में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। अंतरराज्य चेन्नई में भी स्वर्ण, दिल्ली फैडरेशन कप में रजत तथा दिल्ली मंें ही ओपन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता तथा वर्ष २००७ में टाटानगर की ओपन मीट में भी प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक हासिल किया। राष्ट्रीय स्तर पर महिला एथलेटिक्स के डिस्क थ्रो मुकाबलों में लगातार जीत-दर-दर हासिल करने के साथ कृष्णा ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश का प्रतिनिधित्व कर पदक जीते हैं। २००४ में इस्लामाबाद सैफ खेलों में उन्होंने रजत पदक पाया। अगले साल २००५ में थाईलैंड के सोगखला की एशियाई ग्रांड प्रिक्स में कांस्य तथा सिंगापुर में आयोजित इसी स्पर्धा में भी कांस्य पदक ही पाया। इसी स्पर्धा में इंडोनेशिया के सूरावाया में रजत और दक्षिण कोरिया में एशियाई स्पर्धा में कांस्य पदक प्राप्त किया। वर्ष २००६ में दिल्ली की सालवान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य, पूना की एशियाई ग्रांड प्रिक्स में रजत, बैंगलौर की इसी स्पर्धा में रजत, बैंकाक की ऐसी ही प्रतियोेगिता में भी रजत पदक जीता । इसी साल कतर के दोहा में प्रतिष्ठित एशियाई खेलों में कांस्य व मेलबोर्न के राष्ट्रमंडल मुकाबलों में पांचवा स्थान पाया। वर्ष २००७ में कृष्णा ने बैंकाक की एशियाई स्पर्धा में रजत पदक पाया और ओसाका जापान में आयोजित विश्व एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।

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