Monday, January 17, 2011

गौरव की निगाहें अब एकोन्कागुआ की ओर

माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराने वाले राजस्थान के पहले सिविलियन और चूरू के लाडले गौरव शर्मा की निगाहें अब दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एकोन्कागुआ की ओर हैं। विश्व के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची पहाड़ी चोटियों पर तिरंगा फहराने के ख्वाहिशमंद गौरव संभवतः इस वर्ष मार्च में 23 हजार 834 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पर्वत शिखर पर कदम रख चुके होंगे।

गौरव के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े सांप एनाकोंडा के लिए मशहूर अर्जेंटीना के इस पर्वत शिखर पर चढाई के लिए मार्च से लेकर जून तक का मौसम सबसे बेहतर माना जाता है। वे इस सीजन की शुरुआत में ही इस अभियान को पूरा करने के मूड में हैं। रॉक्स की बहुतायत के कारण एकोन्कागुआ में आरोहण के लिए ज्यादातर रॉक क्लांइंबिंग के सहारे ही चढाई संभव होगी। चट्टानों की अधिकता से फिसलन के खतरे के चलते भी यह चढाई खासी चुनौतीपूर्ण रहेगी। इससे पहले गौरव को दलदली और कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना होगा। गौरव बताते हैं कि वहां वातावरण अनुकूलन में भी थोड़ी परेशानी आ सकती है क्योंकि हिमालय की बजाय वहां की परिस्थितियां कुछ अलग हैं और ऑक्सीजन की मात्रा का प्रतिशत भी कम है। इन सब मुश्किलों के बावजूद गौरव के मन में कोई घबराहट, कोई बैचेनी नहीं क्योंकि गौरव को अपने हौंसले और शुभचिंतकों की दुआओं पर पूरा भरोसा है। फिर साउथ अ अफ्रीका के सबसे ऊंचे पर्वत किलीमिंजारो में उनके हमसफर रहे जयपुर के युवा साथी हरनाम सिंह इस बार भी उनके साथ होंगे। ऎसे में कहा जा सकता है निस्संदेह गौरव मार्च 2011 के किसी खूबसूरत पल में एकोन्कागुआ पर तिरंगा लहराते हुए उस पल की खूबसूरती में और इजाफा कर रहे होंगे।

सात शिखर छूने का सपना

चूरू के बाशिंदे गौरव ने 20 मई 2009 को दुनिया की सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। इसके बाद उन्होंने विश्व के सातों महाद्वीपों के सर्वाधिक ऊंचाई वाले पर्वत शिखरों के आरोहण का संकल्प किया। इसी सपने को सच करने की दिशा में उन्होंने पिछले साल स्वाधीनता दिवस के मौके पर दक्षिणी अफ्रीका के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट किलीमिंजारो पर अपने कदम रखे। अपने इन अभियानों में गौरव को खासी शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पडा है लेकिन वे हार मानने वालों में से नहीं हैं। हर बार अपनी संघर्ष क्षमता के बूते इन्होंने सफलता का दामन थामा है।

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Thursday, January 6, 2011

वीणा सहारण इन ओनली मीडिया वीकली

ओनली मीडिया साप्ताहिक
पांच जनवरी 2011

Friday, May 7, 2010

चूरू के जयपाल स्वामी का आईसीएस में चयन

चूरू, 07 मई। आईसीएस परीक्षा में तीन बार इंटरव्यू फेस कर असफल होने के बावजूद हार नहीं मानने वाले चूरू के जयपाल स्वामी आईसीएस में चयन (453 वीं रैंक) के बाद अब संतुष्ट महसूस कर रहे है। उनका कहना है कि आखिर उन्हें अपनी मेहनत का फल मिल ही गया।
जिले की तारानगर तहसील के गांव बूचावास में किसान दंपत्ति महादेव प्रसाद स्वामी और माता शांति देवी के आंगन में आठ जनवरी 1980 को जन्मे जयपाल स्वामी फिलहाल राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सोमासी में तृतीय श्रेणी अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एसबीडी कॉलेज सरदारशहर से बीए करने के बाद राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली से बीएड का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इससे पूर्व वे छह बार आईसीएस परीक्षा में शामिल हो चुके हैं और तीन बार इंटरव्यू का सामना उन्होंने किया है। गत वर्ष आरएएस में उन्होंने 17 वीं रैंक हासिल की थी।
जयपाल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद उसके आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं आने दी। आईसीएस परीक्षा के लिए जयपाल ने दिल्ली में रहकर भी तैयारी की, जिसका लाभ उन्हें आरएएस परीक्षा में भी मिला तो आईसीएस में भी। जयपाल कहते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पानी है तो पढाई का हिसाब घंटों में मत रखो। जब तक अध्ययन बिंदु समझ में नहीं आ जाए, तब तक उसे छोड़ो मत, इसमें चाहे कितना भी समय लगे।
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बायोडाटा - जयपाल स्वामी
नाम -श्री जयपाल स्वामी
पिता का नाम श्री महादेव प्रसाद स्वामी
माता का नाम श्रीमती शांति देवी
आईसीएस में रैंक 453 वीं
जन्म तिथि 08.01.1980
शिक्षा बीए, बीएड

पता ग्राम -बूचावास, तारानगर, चूरू राजस्थान
मोबाइल नंबर 9783337713
प्रयास -आईसीएस में यह सातवां प्रयास
-पूर्व में तीन बार इंटरव्यू का सामना
-आरएएस 2009 में 17 वीं रैंक
संप्रति तृतीय श्रेणी अध्यापक, राउप्रावि सोमासी, चूरू।
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Monday, April 5, 2010

मानवीय संवेदनाओं के कुशल चितेरे हैं रामकिशन अडिग

जिला कलक्टर डॉ कृष्णाकांत पाठक ने प्रयास संस्थान की ओर से सूचना केंद्र में आयोजित कला प्रदर्शनी का शुभारंभ किया
चूरू, 4 अप्रैल। शहर के सूचना केंद्र में रविवार को प्रयास संस्थान की ओर से आयोजित ख्यातनाम प्रयोगधर्मी चित्रकार रामकिशन अडिग की कलाकृतियों की प्रदर्शनी का शुभारंभ जिला कलक्टर डॉ कृष्णाकांत पाठक ने किया। इस मौके पर अडिग की कलाकृतियों की सराहना करते हुए डॉ पाठक ने कहा कि संवेदना प्रत्येक व्यक्ति के मन में होती है, लेकिन चित्रकर अपने इर्द-गिर्द घटती घटनाओं और परिवेश से जुड़ी प्रतिक्रियाओं के सहारे मानवीय संवेदनाओं का अनूठा संसार रच देता है। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान चित्रकार अडिग ने दृश्यमान जगत के विरोधाभास, विषमता, ऊंच-नीच, भीतरी छटपटाहट और आर्थिक वर्गों में बंटी दुनिया को रंगोें के जरिए कैनवास पर उतारा है। उन्होंने कहा कि अपनी कलाकृतियों में अडिग रंगों के खिलाड़ी के रूप में सामने आते हैं और मूर्त को अमूर्त व अमूर्त को मूर्त बनाने में उनके भीतर की कला अभिव्यक्त होती है।

चूरू के वरिष्ठ चित्रकार जी एन अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह में अतिरिक्त कलक्टर बी एल मेहरड़ा ने कहा कि यू ंतो प्रत्येक व्यक्ति हर दिन अनगिनत घटनाओं से रूबरू होता है लेकिन सृजनधर्मी का दृष्टिकोण प्रत्येक घटना के प्रति अलग होता है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में व्याप्त असंगतियां और विषमताएं सृजक के मन में आक्रोश उत्पन्न करती है और यही आक्रोश सृजन का रूप धरकर सामने आता है।
विशिष्ट अतिथि हनुमान कोठारी ने कहा कि अडिग एक ऎसे कलाकार हैं, जिनके यहां कोई भी कथ्य हो, एक गहरी रागात्मकता और कल्पनाशीलता के साथ कई आयामों को लेकर प्रकट होता है। चित्रकार जी एन अंसारी ने अडिग की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि नारी विमर्श से जुड़े उनके चित्रो रेखांकनों में एक खास बात ध्यान खींचती है कि यहां अडिग की कलम और कूंची में एक सांगीतिक लय है जो नारी के उस अज्ञात और गोपन संसार के अपने आनंद को अभिव्यक्त करने में सहायक होती है, जिसमें एक स्त्री अपना वैयक्तिक सुख खोजती है।
चित्रकार रामकिशन अडिग ने इस मौके पर कहा कि सैकड़ों प्रदर्शनियों में वे अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन अपने गृहजिले में प्रदर्शनी को लेकर वे बहुत उत्साहित और प्रसन्न हैं। उन्होंने अपनी सृजन प्रक्रिया और अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि अपने चारों तरफ की तमाम अच्छी-बुरी चीजें उनकी संवेदनाओं को सृजन की शक्ति और प्रेरणा देती हैं। प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने आभार जताया। इससे पूर्व संस्थान के सचिव कमल शर्मा, सुधींद्र शर्मा सुधि आदि ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार बैजनाथ पंवार, सहायक जनसंपर्क अधिकारी कुमार अजय, मानसिंह सामौर, श्रीभगवान सैनी, डॉ रामकुमार घोटड़, डॉ सत्यनारायण शांडिल्य, अलका पालावत, मंजू शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाप्रेमी, साहित्यकार, पत्रकार और शहर के गणमान्य नागरिक मौजूद थे। कला-प्रदर्शनी को देखने के लिए दिनभर सूचना केंद्र में शहरवासियों का तांता लगा रहा। कलाप्रेमियों ने अडिग की कलाकृतियों को गौर से निहारा और आयोजन की सराहना की।
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